मनुष्य को अपने द्वारा अर्जित धन का कम से कम दसवां हिस्सा दान अवश्य करना चाहिए
कथा व्यास भूपेन्द्र मिश्र ने भागवत के श्लोकों और महाभारत के संस्मरणों के माध्यम से जीवन के मूलभूत सिद्धांतों पर गहन प्रकाश डाला

गाजीपुर।मरदह ब्लाक के गोविंदपुर कीरत मठिया गांव में बुधवार की रात में कथा व्यास भूपेन्द्र मिश्र ने भागवत के श्लोकों और महाभारत के संस्मरणों के माध्यम से जीवन के मूलभूत सिद्धांतों पर गहन प्रकाश डाला।साथ ही दान की महिमा का वर्णन किया।
श्रीमद् भागवत कथा का कार्यक्रम धार्मिक उल्लास और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ।कथा व्यास पंडित ने भागवत के श्लोकों और महाभारत के संस्मरणों के माध्यम से जीवन के मूलभूत सिद्धांतों पर गहन प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने द्वारा अर्जित धन का कम से कम दसवां हिस्सा दान अवश्य करना चाहिए।यह दान केवल आर्थिक सहायता नहीं,बल्कि आत्म शुद्धि और समाज कल्याण का मार्ग भी है।दान व्यक्ति को सांसारिक आसक्ति से ऊपर उठाकर परोपकार और संतोष की ओर प्रेरित करता है।कथा के मध्य उन्होंने भीष्म पितामह के जीवन प्रसंगों का स्मरण कराया और बताया कि मृत्यु शैय्या पर उन्होंने अपने परिवार और समाज को उपदेश दिया था कि राजा का प्रथम कर्तव्य है कि वह प्रजा का पालन पुत्रवत करे,न्याय और धर्म को सर्वोपरि रखे और अंत में प्रभु भक्ति के बल पर मोक्ष को प्राप्त करे।श्रीकृष्ण के समक्ष भीष्म का देहावसान त्याग,तप,क्षमा और दया का जीवंत उदाहरण है।उन्होंने कहा कि अंत समय में भीष्म अपने कर्मों का चिंतन करते हुए स्वयं को दोषमुक्त नहीं मानते,लेकिन भक्ति,सत्य और समर्पण के बल पर कृष्ण के सम्मुख उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।कथा व्यास जी ने कलयुग के दुर्गुणों की चर्चा करते हुए कहा कि आज मन में क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और छल का वास बढ़ता जा रहा है। इससे बचने का सबसे सरल और सिद्ध मार्ग है राम नाम का जप।इस अवसर पर दयाशंकर चौबे,कैलाश चौबे,विजय शंकर चौबे, चतुर्भुज चौबे,अवनीश चौबे,सपा नेता रामनारायण यादव आदि मौजूद रहे।अंत में आरती,भजन और प्रसाद वितरण के साथ कथा विराम हुआ।



