पहले तुम मानवतावादी बनो,मानव धर्म व मानव कर्म अपनाओ
प्रभु की आराधना करें और अपनी जीवात्मा का कल्याण करा लें

गाजीपुर। 83 दिवसीय शाकाहार-सदाचार मद्यनिषेध अध्यात्मिक जनजागरण यात्रा के 55 वें पड़ाव पर संत पंकज जी महाराज का काफिला उकरांव सादात यहाँ आयोजित सत्संग समारोह में उन्होंने कहा कि युगों-युगों के बाद यह दुर्लभ मानव शरीर आपको मिला है। इन आंखों से जो कुछ भी दिखाई देता है,वह सब माया कि छाया है।मौत के समय यह सब यहीं छूट जाता है।महात्मा समझाते हैं कि मनुष्य शरीर से बढ़कर कोई योनि नहीं है,क्योंकि इसी में परमात्मा को पाने,साधन भजन करके अपने घर जाने का एक मात्रा दरवाजा है। उस दरवाजे का भेद केवल सन्त महात्मा ही जानते हैं।इसे पाने के लिये आवश्यक है कि पहले तुम मानवतावादी बनो।मानव धर्म व मानव कर्म अपनाओ। मानव धर्म यह है कि इंसान इंसान के काम आये। एक-दूसरे की निःस्वार्थ भाव से सेवा करें।सत्य,दया, अहिंसा,परोपकार आदि गुणों को अपने जीवन में उतार कर,किसी सन्त महात्मा की खोज करके,उनसे प्रभु प्राप्ति का रास्ता लेकर के प्रभु की आराधना करें और अपनी जीवात्मा का कल्याण करा लें।आज विश्व के लोग विषय विकारों में शराब,मांस,मदिरा में सुख की खोज कर रहे हैं।ऐसे चरित्र पतन जैसे कार्यों में फंस कर यह जनमानस कैसे सुखी हो सकता है।कैसे प्रभु की दया पा सकता है।सबसे अपील किये कि सभी शाकाहारी हो जाय और शराब आदि नशीली चीजों से दूर रहें।अच्छे समाज के निर्माण में भागीदार बनें।संत पंकज जी ने आज नवयुवकों में नशें की बढ़ती आदत, चरित्र पतन,मांसाहार की ओर झुकाव पर चिन्ता व्यक्त किया।इसके लिये बच्चों को भी महात्माओं के पास ले आने,उनके बचन सुनाने का आग्रह किया कहा कि ये बच्चे आपके व देश के भविष्य हैं।इनको अच्छे संस्कार दें,राम और कृष्ण बनाओ इससे आपका भी बुढ़ापा अच्छे से व्यतीत होगा और देश का भी कल्याण होगा।पूज्य महाराज जी ने माला लेकर सुमिरन,ध्यान व भजन विस्तार से समझाया।ऊपरी लोकों का वर्णन किया।बताया कि रास्ता सच्चा है,करोगे तो दिखाई भी देगा और सुनाई भी देगा।जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था मथुरा में चलाये जा रहे धर्मांध कार्यों के बारे में भी बताया।इस मौके पर शिवनारायण चौहान,बबलू सोनकर,कैलाश,रामबचन लेखपाल,पंचम यादव, रमाकान्त चौहान अपने सहयोगियों के साथ मौजूद रहे।



