भारत में इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी का बढ़ता महत्व:मो.राशिद खाँ
आर्थिक प्रगति का आधार आईटी सेक्टर,ऑटोमोबाइल,निर्माण, दूरसंचार,

कानपुर।भारत आज जिस विकास यात्रा पर आगे बढ़ रहा है, उसमें इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी की भूमिका केंद्रीय हो गई है। बीते कुछ दशकों में हमने देखा है कि किस प्रकार तकनीकी नवाचारों ने न केवल अर्थव्यवस्था को मज़बूत किया है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को भी नई दिशा दी है।
आर्थिक प्रगति का आधार आईटी सेक्टर,ऑटोमोबाइल,निर्माण, दूरसंचार,ऊर्जा और रक्षा—इन सभी क्षेत्रों में इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी की सीधी भागीदारी है। आज भारत दुनिया का आईटी हब माना जाता है और “स्टार्टअप इंडिया” की पहल ने लाखों युवाओं को तकनीकी नवाचार की ओर आकर्षित किया है। यही कारण है कि भारतीय इंजीनियर और तकनीशियन विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं।
शिक्षा और अनुसंधान की आवश्यकता
हमारे देश की सबसे बड़ी ताक़त युवाओं की संख्या है। हर साल लाखों छात्र इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। किंतु केवल डिग्री प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा को शोध, प्रयोगशाला और उद्योग से जोड़ना आवश्यक है ताकि विद्यार्थी वास्तविक समस्याओं के समाधान तैयार कर सकें। नई तकनीक—जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ग्रीन एनर्जी, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष विज्ञान—में भारत को अग्रणी बनने के लिए यही सबसे बड़ा कदम होगा।
गाँवों तक पहुँचती तकनीक
डिजिटल इंडिया, ई-गवर्नेंस और स्मार्ट खेती जैसे कार्यक्रमों ने साबित किया है कि तकनीक केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण भारत तक जब तकनीकी साधन पहुँचते हैं, तो वे शिक्षा, स्वास्थ्य, खेती और रोज़गार में क्रांतिकारी बदलाव लाते हैं। यही सच्चा आत्मनिर्भर भारत का मार्ग है भारत अमृतकाल की ओर बढ़ रहा है और यह समय है जब हमें इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी को केवल आर्थिक विकास का साधन न मानकर सामाजिक परिवर्तन का औज़ार भी समझना चाहिए। सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जिसमें नवाचार को प्रोत्साहन मिले और भारत तकनीकी महाशक्ति के रूप में उभर सके।
मो.राशिद खाँ
प्लास्टिक टेक्नोलॉजी विभाग
एच.बी.टी.यू.,कानपुर।



