अन्यायपूर्ण कृत्यों के विरुद्ध वैधानिक विरोध का अधिकार है और वे इसका प्रयोग जारी रखेंगे
अन्यायपूर्ण कृत्यों के विरुद्ध वैधानिक विरोध का अधिकार है और वे इसका प्रयोग जारी रखेंगे

गाजीपुर।डॉ.मनोज कुमार सिंह, मनोविज्ञान विभाग के विभाग प्रभारी और पीजी कॉलेज शिक्षक संघ के महामंत्री, ने वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय पर मनोविज्ञान विषय की अध्ययन परिषद के संयोजक की “नियम विरुद्ध” नियुक्ति का आरोप लगाया है। यह मामला अब महामहिम राज्यपाल (कुलाधिपति) के समक्ष विचाराधीन है, जिसके तहत “डॉ. मनोज कुमार सिंह बनाम कुलपति” वाद संख्या 35/2024 दर्ज किया गया है।डॉ.सिंह का आरोप है कि तिलकधारी महाविद्यालय में परास्नातक मनोविज्ञान विभाग स्ववित्तपोषित होने के बावजूद उसे नियमविरुद्ध अनुदानित दिखाकर एक शिक्षक को अवैध रूप से अध्ययन परिषद का संयोजक नियुक्त किया गया। इस कानूनी कार्रवाई के बाद, विश्वविद्यालय और संबंधित महाविद्यालय के कुछ पदाधिकारी व शिक्षक उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण अभियान चला रहे हैं।डॉ.सिंह ने पूर्व में भी राज्यपाल से अपने पक्ष में फैसला प्राप्त किया था,जिसके बाद वे विभाग के वरिष्ठतम शिक्षक हैं।उन्होंने बताया कि इस फैसले के बाद से विश्वविद्यालय का उनके प्रति रवैया नकारात्मक रहा है।15 सितंबर 2017 से पदस्थापित डॉ.सिंह को कभी भी शिक्षण या अनुशासन को लेकर कोई नोटिस नहीं मिला है।उन्होंने अपने विरोधियों द्वारा लगाए गए आरोप को इसे अपने चरित्र पर हमला बताया है और शिक्षा प्रशासन, प्रशासन और पत्रकारिता जगत से बिना पुख्ता प्रमाण के कोई भी कार्यवाही शुरू न करने या समाचार प्रकाशित न करने की अपील की है।डॉ.सिंह ने वर्तमान विश्वविद्यालय शिक्षक संघ अध्यक्ष डॉ.राहुल सिंह और उनके गुट को अपने विरोध का कारण बताया है।उन्होंने स्पष्ट किया कि एक शिक्षक और महामंत्री के रूप में उन्हें अन्यायपूर्ण कृत्यों के विरुद्ध वैधानिक विरोध का अधिकार है और वे इसका प्रयोग जारी रखेंगे।



