ग़ाज़ीपुर

साहित्यकार हृषिकेश जी की पुण्यतिथि समाज और साहित्य विषयक संगोष्ठी के रूप मनाई गई

साहित्यकार हृषिकेश जी की पुण्यतिथि समाज और साहित्य विषयक संगोष्ठी के रूप मनाई गई

गाजीपुर।प्रसिद्ध साहित्यकार,मार्क्सवादी चिंतक स्व हृषिकेश जी की पुण्यतिथि भारद्वाज भवन पर समाज और साहित्य विषयक सम्बन्धी गोष्ठी के रूप में मनाई गई।विषय प्रवर्तन करते हुए भाकपा राज्यकार्यकारिणी सदस्य अमेरिका सिंह यादव ने कहा कि समाज की कसौटी पर वह साहित्य खरा उतरेगा जिसमें उच्च चिंतन हो,स्वाधीनता का भाव हो,सौंदर्य का सार हो,सृजन की आत्मा हो,जीवन की सच्चाईयों का प्रकाश हो जो हम में गति,संघर्ष,और बेचैनी पैदा करे,सुलाये नही हृषिकेश जी ऐसे ही साहित्यकार थे।सत्ता से प्रश्न करने की उनमें हिम्मत थी। गोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉक्टर राम बदन सिंह ने कहा कि, कल्पना,ज्ञानोदय,विकल्प, कहानियां पत्र पत्रिकाओं में छपी और सराही गई।इसके अतिरिक्त कत्लेआम,मिस सोलोमन का जहन्नुम,पोस्ट कार्ड,शिविर वीरानियां ,जैसी कहानियां काफी लोक प्रिय रही।जिसने आलोचकों का ध्यान आकृष्ट किया।कमलेश्वर के उपन्यास कितने पाकिस्तान की समीक्षा काफी चर्चित हुई थी।उनकी साहित्य में आम लोगो के जीवन की पीड़ा भी परिलक्षित होती है।उनके अंदर निर्भीकता कूट कूट कर भरी थी।उन्होंने सिद्धांतो से कभी समझौता नहीं किया।वे हमारी प्रेरणा के स्रोत बने रहेंगे।गोष्ठी में चिकित्सक पीयूष कांत सिंह, ईश्वरलाल गुप्ता,साहब सिंह यादव,जयहिंद कुमार प्रजापति आदि ने उन्हे याद करते हुए कहा कि आज के दौर में ऐसे साहित्यकारों एवं चिंतको की अतिआवश्यकता है।अंत में दो मिनट का मौन रखकर शोक व्यक्त किया गया।अध्यक्षता ईश्वरलाल गुप्ता सह सचिव भाकपा ने किया।

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