
उत्तर प्रदेश।देश में लोकसभा के आम चुनाव समाप्त हो चुके हैं और एक बार फिर एनडीए की सरकार देश में बनने जा रही है पहली बार ऐसा हो रहा है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी खुद के दम पर बहुमत से दूर है इसलिए उसको अपने सहयोगी दलों का सहारा लेना पड़ रहा है और इसका सबसे बड़ा नुकसान भारतीय जनता पार्टी को उत्तर प्रदेश की राजनीति में उठाना पड़ा है जहां अखिलेश यादव के टिकट वितरण ने भारतीय जनता पार्टी के बड़े-बड़े सूरमाओं को धराशाई कर दिया।इसी के क्रम में गाजीपुर की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब एक बार फिर अफजाल अंसारी ने अपनी चाणक्य नीति के बलबूते भारतीय जनता पार्टी को केवल गाजीपुर में ही नहीं बल्कि बलिया और मऊ में भी चारो खाने चित्त कर दिया।मतगणना से ठीक 1 दिन पहले अफजाल अंसारी ने जिन-जिन सीटों पर जीत की भविष्यवाणी की वह सारी अटकलें उनकी सच साबित हुई, अफजाल के करीबी बताते हैं कि अफजाल अंसारी बूथ वाइज अपना पूरा मैनेजमेंट करके और लगभग 8 घंटे में ही अंदाजा लगा लेते हैं कि गाजीपुर और बलिया की सीट का परिणाम क्या आने वाला है।पिछली बार बसपा गठबंधन और बसपा के टिकट पर लड़े अफजाल अंसारी ने वर्तमान समय के महामहिम मनोज सिन्हा को एक लाख 19 हजार से मात दी थी और इस बार अंदाजा लगाया जा रहा था और बड़े-बड़े राजनीतिक पंडित यह कह रहे थे कि अफजाल अंसारी के पिछली जीत में बसपा का बड़ा हाथ रहा है लेकिन अब अफजाल ने इन सारी अटकलो पर विराम देते हुए इस बार के चुनाव में उससे भी ज्यादा 124000 लगभग मतों से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार पारस राय को करारी शिकायत दी।जखनियां विधानसभा को दो बार से सुहेलदेव जीत रही है क्योंकि राजभरों का बड़ा पैकेट है।वहां पर भी अफजाल अंसारी ने पारस राय के गृह विधानसभा जखनिया में 26447 मतों से पीछे छोड़ दिया।वही अफजाल अंसारी ने सैदपुर विधानसभा में 36692 हजार मतों से लीड करके पूर्व एमएलसी कैलाश सिंह, वर्तमान एमएलसी विशाल सिंह चंचल,वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष सपना सिंह,को भी यह बता दिया कि बिना अफजाल के गाजीपुर की राजनीति शून्य है।अफजाल ने विशाल सिंह चंचल के गांव और सपना सिंह के गांव में बड़ी जीत दर्ज करके यह बता दिया कि आपके भी क्षेत्र में अफजाल अंसारी किसको कहा जाता है।गाज़ीपुर विधानसभा में विधायक जयकिसुन शाहू ने वैश्य मतों में सेधमारी करके अफजाल अंसारी को 11 हजार से ऊपर की लीड करा दी।सदर विधानसभा में अफजाल अंसारी ने बिंद मतों में से सेंधमारी करके संगीता बलवंत के राज्यसभा भेजने के भाजपा के निर्णय पर भी सवालिया निशाना खड़ा कर दिया।वहीं जंगीपुर विधानसभा में अफजाल अंसारी ने यादव कुशवाहा और मुस्लिम मतों की बदौलत 27057 की बढ़त बनाई रखी।पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह के गृह विधान सभा जमानिया में अफजाल अंसारी ने पारस राय को 22793 मतों से पीछे छोड़ दिया।इस तरह से अफजाल लें भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार पारस राय को 124000 के ऊपर के बड़े अंतर से हराकर दिल्ली की संसद की तरफ रुख किया।अफजाल अंसारी पर सरकार द्वारा चलाए जा रहे हंटर और मुख्तार अंसारी की मौत से उपजी सहानभूति ने बलिया में भी इसका असर दिखा चुकी अफजाल अंसारी का घर बलिया लोकसभा के अंतर्गत मोहम्मदाबाद विधानसभा में आता है।हालांकि सपा उम्मीदवार सनातन पांडेय ने बलिया के तीनों विधानसभा से मात्र 4000 की लीड लेकर मोहम्मदाबाद आए थे लेकिन मुहम्मदाबाद में अफजाल अंसारी की चाणक्य नीति ने 25000 से ऊपर से बड़ी लीड सनातन पांडेय को दिलाई जहां से की भारतीय जनता पार्टी के जीत के दरवाजे बंद हो गए, वही अफजाल के भतीजे मन्नू अंसारी ने जहूराबाद और मोहम्मदाबाद का दौरा करके मतों को सहेजने में बड़ी भूमिका निभाई जिससे जहुराबाद में भी समाजवादी पार्टी को 14000 से ऊपर की बढ़त मिली और बलिया लोकसभा को आजादी के बाद पहली बार कोई ब्राह्मण सांसद मिल गया।अफजाल के करीबी बताते हैं की अफजाल अंसारी पूरे चुनाव को मैनेजमेंट खुद देखते हैं और इस चुनाव में अफजाल अंसारी ने गैर यादव मतों को साधने के लिए अति पिछड़े जैसे कुशवाहा बिंद और राजभर बस्तियों में ही अपनी छोटी-छोटी नुक्कड़ सभाओं की बदौलत गाजीपुर के राजनीति में नया आयाम तैयार किया, कुछ भी लेकिन एक बार फिर अफजाल अंसारी ने राजनीति के बड़े बड़े पंडितो को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि लगता है कि गाजीपुर की राजनीति में अफजाल नाम ही काफी है।